पश्चिम एशिया तनाव के बीच इस्लामाबाद में US-ईरान वार्ता संभव
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अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में संभावित वार्ता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है।
पाकिस्तान, कतर और तुर्की के नेताओं की बैठक में क्षेत्रीय शांति और संवाद को बढ़ावा देने पर जोर, पाकिस्तान की भूमिका की सराहना हुई।
इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन का युद्धविराम, ट्रंप की पहल से तनाव कम करने की कोशिश, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम।
US Iran/ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच वार्ता का अगला दौर इस्लामाबाद में आयोजित हो सकता है। इस संभावित वार्ता को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल रविवार को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं, जबकि औपचारिक वार्ता सोमवार को होने की संभावना है। यह बातचीत ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए कई देशों द्वारा सक्रिय कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच शहबाज शरीफ से शेख तमीम बिन हमद अल थानी और रजब तैयब एर्दोगन ने मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया गया। नेताओं ने इस दिशा में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की। यह बैठक Antalya Diplomacy Forum के इतर हुई, जहां वैश्विक नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की।
इसके अलावा, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान में ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ से मुलाकात की। इस दौरान अमेरिका-ईरान संबंधों को सामान्य करने और वार्ता को आगे बढ़ाने के संभावित रास्तों पर विचार-विमर्श हुआ।
गौरतलब है कि हाल ही में आयोजित “इस्लामाबाद पीस टॉक्स” के दौरान दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत का प्रयास किया गया था, हालांकि वह निष्कर्षहीन रहा। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद बेहद सीमित रहे हैं, ऐसे में यह वार्ता काफी अहम मानी जा रही है।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा की है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने जोसेफ औन और बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम और प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता, दोनों मिलकर क्षेत्र में तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, जमीनी हालात और राजनीतिक मतभेदों को देखते हुए किसी ठोस समझौते तक पहुंचना अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।